दुनियावी सफर की तमन्नाएँ बुझ सी गयीं

दुनियावी सफर की तमन्नाएँ बुझ सी गयीं सैर ओ तफ़री की तलब अब मिट सी गयी न तक़बबुर न बरतरी न एहसास ए कमतरी न ग़म न इश्तियाक़ आरज़ू मेरी लुट सी गयी… Continue reading

आधी रात को कुछ मज़दूर आये

आधी रात को कुछ मज़दूर आये साथ अपने लोहे की सलाख़ें लाये एक कुत्ता भौकता पास आया जेल की बू सूंघ छटपटाया जब पुलिस को कुत्तों की नस्ल पाया क़ैद ख़ाना भी मज़दूरों… Continue reading

Closure ख़ात्मा خاتمہ

Closure                                            ख़ात्मा                    … Continue reading

नहीं, कुछ और

इंसान तो बस अल्लाह के हवाले लेकिन इश्क हमारी जिम्मेदारी

When the bell tolls

When the bell tolls my mind races as if it must act to destroy the bell or herald it either ways the darkness surrounds and all i am is a pawn waiting for… Continue reading

नया दौर

आज मेहफ़िल अजीब सी हैं मेरे वजूद ने इस्तिफा दे दिया हैं।  

We don’t know how to say goodbye/ हमें अलविदा कहना नहीं आता

We Don’t Know How to Say Goodbye – Anna Akhmatova  We don’t know how to say goodbye, We wander on, shoulder to shoulder Already the sun is going down You’re moody, and I… Continue reading

Echo गूँज

Echo – Alexander Pushkin, tr. into English by Micheal Mesic If beasts within a silent forest moan, If trumpets sound, if thunder rolls and cracks, Or young girls sing almost inaudibly – For… Continue reading

जंग -ए- नजीब

जामिया, नजीब से हैं हर्फ़न मौला यक़ीन ये दिलाते, डिग्रियों का अम्बार था एक ड्रामा बस अकबर बनने चले, शहनशा-ए-जामिया के तख़ल्लुस से ही रह गए बस जामिया के तलबा, नजीब से कितनी… Continue reading

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