जंग -ए- नजीब

जामिया, नजीब से हैं हर्फ़न मौला यक़ीन ये दिलाते, डिग्रियों का अम्बार था एक ड्रामा बस अकबर बनने चले, शहनशा-ए-जामिया के तख़ल्लुस से ही रह गए बस जामिया के तलबा, नजीब से कितनी… Continue reading

सिर्फ़ उनके लिये

हर एक बला कमतर है हर एक फन अधूरा है कभी कहो बस अब और नहीं मसीहा मार्क्स अब आएगा नहीं ये बताओ तो कौन है सही बात पे तो कोई डटा नहीं… Continue reading

The Plenary

Ideas are rattled like mumbled prayers, thoughtfully thoughtless, terrifying in their squareness, coffee-tone handshakes, garrisoned moderates elaborate their will together, with visible jest, hustling terminology and any quest, into pardonable sentences, my legs… Continue reading

मौलाना तालिबान – مولانا طالبان

ये कौनसा इस्लाम, किसका है ये फ़रमान क़त्ल ए बेक़सूर कसूरवार अहल ए तालिबान है दीन और दुनिया दोनों से इतमिनान हुए मौलाना कभी फ़ौजी कभी सिपहसालार मज़हब सिखाये बस एक ख़ुदा ख़ौफ़-ए-… Continue reading

The Parade

The Mannequin I have become, whiskered when they please, artificial tassles gather around my stride, misspelled lyrics numbed into marquees, freedom floats in fun, fertile minds beating down reason, pledging their lungs to… Continue reading

छोड़ भी दो

शक़्ल अभी गुम तो न हुई अक़्ल अभी गुल तो न हुई हो गया हो तो अब गायब हो बिन मर्ज़ी इजाज़त हो न हो ठन्डे बस्ते में अब डाल ही दो दिल… Continue reading

मोडर्न मौलाना

ये   कौनसा   इस्लाम,  किसका  है  ये  फ़रमान ख़रीदे   मौलाना  सरकार  से  ज़मीन  कम दाम है   दीन   और   दुनिया    दोनों   से  इतमिनान हुए    मौलाना  … Continue reading

दाढ़ी बढ़ाई थी तो अब काट भी लेंगे

दाढ़ी   बढ़ाई  थी  तो  अब  काट  भी लेंगे क्या सुन्नत  क्या हदीस  सफाई  भी लेंगे ग़ज़ल   में  इलज़ाम   इस्लाम  में  फज़ल क्या तंज़ क्या हक़ीक़त किसे उधार में लेंगे इल्म… Continue reading

उर्दू न सीखी

लानत है हम पे  टाइम  पे उर्दू न सीखी वाल्दा के mcd की टीचर होते न सीखी क़हर टूटे हम पे  टाइम  पे उर्दू न सीखी अब्बु के तल्लफ़ुज़ पे टोकने से न… Continue reading

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