क्यों ये यकायक दुलार/ Why This Sudden At-Homeness

क्यों ये यकायक दुलार, बाज़ी पर जान?
देखूं मैं, डूबूँ मैं तुझमे, बर्फीली चट्टान,
ख़ुद अपने भाइयों को तू करे क़ुर्बान;
उन से पहले
था मैं साथ तुम्हारे, नादान

QWERTY

An ode to qwerty If u jumble it It’s twerqy Maybe that’s what it is Twerqing Our soft shadowy skills For the crisp bills If  qwerty never came along We would be holding… Continue reading

इज़ाफ़ा-ए-क़ुरबत

  इज़ाफ़ा-ए-क़ुरबत गुफ्तुगू से हुआ क़ता ताल्लुक़ हर इज़हार-ए-ख़्याल ले जाता हमें दूर अलहदा बाह्मी एतेकाफ़ ही ज़रिया है क़ुरबत का चेहरों को अपने गिरफ़्त कर छोड़ा उन्हें गुफ़्तुगू करते और चल दिए… Continue reading

दुनियावी सफर की तमन्नाएँ बुझ सी गयीं

दुनियावी सफर की तमन्नाएँ बुझ सी गयीं सैर ओ तफ़री की तलब अब मिट सी गयी न तक़बबुर न बरतरी न एहसास ए कमतरी न ग़म न इश्तियाक़ आरज़ू मेरी लुट सी गयी… Continue reading

आधी रात को कुछ मज़दूर आये

आधी रात को कुछ मज़दूर आये साथ अपने लोहे की सलाख़ें लाये एक कुत्ता भौकता पास आया जेल की बू सूंघ छटपटाया जब पुलिस को कुत्तों की नस्ल पाया क़ैद ख़ाना भी मज़दूरों… Continue reading

Closure ख़ात्मा خاتمہ

Closure                                            ख़ात्मा                    … Continue reading

नहीं, कुछ और

इंसान तो बस अल्लाह के हवाले लेकिन इश्क हमारी जिम्मेदारी

When the bell tolls

When the bell tolls my mind races as if it must act to destroy the bell or herald it either ways the darkness surrounds and all i am is a pawn waiting for… Continue reading

नया दौर

आज मेहफ़िल अजीब सी हैं मेरे वजूद ने इस्तिफा दे दिया हैं।  

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