मौलाना तालिबान – مولانا طالبان

ये कौनसा इस्लाम, किसका है ये फ़रमान
क़त्ल ए बेक़सूर कसूरवार अहल ए तालिबान

है दीन और दुनिया दोनों से इतमिनान
हुए मौलाना कभी फ़ौजी कभी सिपहसालार

मज़हब सिखाये बस एक ख़ुदा ख़ौफ़-ए- मिसाल
ख़ौफ बोए हरमज़ाद साम्राजी टट्टू तालिबान

पिंजिरे में क़ैद क़ौम को किये बेज़ार
ख़ुत्बे में मौलाना दिखाये हूरों के ख़्वाब

घर में पकाना खिलाना आज भी औरतों का काम
पुख़्ता मौलाना, पैर भी दब्वाये फ़र्ज़ के नाम

दोज़ख़ में चक्की अगर जेल सी पीसे अज़ाब
अल्लाह तौबा, मौलाना पिसवाएगा बच कर भाग

یہ کونسا اسلام کسکا ہے یہ فرمان
قتل ہے بےقصور قصوروار احل ہےطالبان

ہے دین اور دنیا دونو سے اطمنان
ہوے مولانا کبھی فوجی کبھی سپہسالار

مہذب سکھاے بس ایک خدا خوف ے مثال
خوف بوے ہرمزا سامراجی ٹٹو طالبان

پنجرے میں قید قوم کو کیے بیزار
خطبے میں مولانا دکھاے حوروں کے خواب

گھر میں پکانا کھلاناآج بھی عورتوں کا کام
پختہ مولانا پیر بھی دبواے فرض کے نام

دوزخ میں چکّی اگر جیل سی پیسے عذاب
الله توبہ مولانا پسواےگا بچ کر بھاگ