दाढ़ी बढ़ाई थी तो अब काट भी लेंगे

दाढ़ी   बढ़ाई  थी  तो  अब  काट  भी लेंगे
क्या सुन्नत  क्या हदीस  सफाई  भी लेंगे

ग़ज़ल   में  इलज़ाम   इस्लाम  में  फज़ल
क्या तंज़ क्या हक़ीक़त किसे उधार में लेंगे

इल्म ए रियाज़ी  के  पक्के  ज़ेहन  से  तेज़
बचपन   से  माक़ूल  अब  भेस  उतार  लेंगे

जूनून  फितरत में तो किसी  और के न था
सास   थामे  चुप   तूफां  में  ही  सास  लेंगे

बरक़त  तेरे   बोल   बस  बोल  चुक  होसेब
नक़ाब   अदब  का  ओढ़े  दाद  एडवांस लेंगे